अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
12.30.2007
चंदन-पानी
रचियता : दिव्या माथुर

दिल का रोग
दिव्या माथुर


आपको याद अब नहीं करते
वक़्त बरबाद हम नहीं करते

मिलते रहने का इक जुनून सा था
आपको देखे बिना सुकून न था
बेकरार आप अब नहीं करते
रातें बेकार हम नहीं करते

इक ज़माना था आहें भरते थे
यूँ ही बेवजह अश्क झरते थे
इक धुँधला सा अक्स बाकी है
जिसे पहचान हम नहीं सकते

कुछ ज़ियादा ही ये धड़कता है
दिल का ये रोग हमको लगता है
परवाह धुएँ की कौन करता है
दिल ये जलता है हम नहीं जलते

कौंधता तन था मेरा बिजली सा
मन था कांटे में फँसी मछली सा
ज़ख्म सब आफ ही तोहफे हैं
शुक्रिया कैसे हम नहीं करते

आपको याद अब नहीं करते
वक़्त बरबाद हम नहीं करते।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें