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05.22.2014

बूँद-बूँद आकाश
डॉ. गौतम सचदेव
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तितलियाँ ये क्या टटोलें

तितलियाँ ये क्या टटोलें
फूल हँस दें कुछ न बोलें

कौन कलियों को बताये
रूप ये ऐसे न खोलें

फूल हम जैसे नहीं हैं
ये न जग में ज़हर घोलें

प्यार की दस्तक सुनें तो
दें न कुछ पर द्वार खोलें

मिल गये हैं मुस्कुरा दें
बाद में बोलें-न-बोलें


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