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05.05.2014

बूँद-बूँद आकाश
डॉ. गौतम सचदेव
090

प्यार मिट्टी से हुआ

प्यार मिट्टी से हुआ दिल और उखड़ा
देश का ज़ालिम सताये रोज़ दुखड़ा

रोज़ हमने की बड़ी तीमारदारी
देश का लेकिन वही बीमार मुखड़ा

पूजते हैं हम उसे माँ वह सभी की
क्यों चढ़े उसकी कमर पर एक कुबड़ा

लोग सेवा के लिए अब ताल ठोंकें
तेल वादों का उन्होंने खूब चुपड़ा

पत्थरों पर नाम दाता ने लिखाया
आँसुओं का है जहाँ तालाब उमड़ा

चाँद पर ले जा रहे हैं वे सभी को
कह रहे देखों नहीं यह मुल्क उजड़ा

बन गये रहबर बड़े अच्छे मदारी
इन तमाशों से तिरंगा और उधड़ा

हिन्द की जय बोलते जाओ ख़ुशी से
क्या करोगे देखकर यह कोढ़ उघड़ा

बाँट लो चाहे वतन की कुल ज़मीं को
दो हमें उसकी मुहब्बत एक टुकड़ा


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