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04.20.2014

बूँद-बूँद आकाश
डॉ. गौतम सचदेव
070

दिल ख़ुदा से कम नहीं है

दिल ख़ुदा से कम नहीं है कब सका पहचान कोई
लोग बिन मज़मून के देते रहे उनवान कोई

रुक गया दिल आँधियों के साथ उड़ते देख तिनके
आशियाँ का और कब तक देखता नुक़्सान कोई

आग हो अन्दर मगर हों देखती ख़ामोश आँखें
देखिए इनसे कहीं आ जाये न तूफ़ान कोई

क्या बताएँ यार हमसे तुम सदा जब पूछते हो
पालते हो किस लिए बेदर्द हिन्दुस्तान कोई

ख़ूब चारों ओर दिल की बोलियाँ लगने लगीं हैं
हर बदन में खुल गई है प्रेम की दूकान कोई

मुश्किलें आसान करने के तरीक़े कम नहीं हैं
कब दिलों की मुश्किलों को कर सका आसान कोई

आदमी को रास आता ही नहीं इनसान बनना
इसलिए बनता फिरे वह हर जगह भगवान कोई

बच न पायेगी ख़ुशी अब और अपनी ज़िंदगी में
बन गया साथी हमारा ख़ास इक अरमान कोई

कौन कहता है कि "गौतम" को मिलेगी कामयाबी
वह न दीवाना लिखा उसने नहीं दिवान कोई 


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