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04.20.2014

बूँद-बूँद आकाश
डॉ. गौतम सचदेव
063

देश को वे बाँधते

देश को वे बाँधते बहते हुए शहतीर से
बेड़ियों के साथ बाँधे गरदनें ज़ंजीर से

मुल्क दुनिया की क़तारों में जहाँ शामिल हुआ
रह गया चेहरा अलग उसका फ्टी तस्वीर से

देश को फिर से जगाने के हुनर बढ़ने लगे
जोश से करने लगे ख़िदमत सभी तक़रीर से

दर्दमंदों ने किया अनशन ग़रीबों के लिए
पेट भरना पर न भूले वे सुबह अंजीर से

बाढ़ आने की ख़बर से हो गया नेता दुखी
बाँटता है दर्द वह अख़बार की तहरीर से

वह अहिंसा का कभी मतलब समझ सकता नहीं
रहम की फ़रियाद जो करता रहे शमशीर से


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