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04.20.2014

बूँद-बूँद आकाश
डॉ. गौतम सचदेव
062

दर्द है दिल में कलम क्योंकर कराही

दर्द है दिल में कलम क्योंकर कराही
हो गई बदनाम उँगली पर सियाही

क्या बुरी है दुश्मनी उस दोस्ती से
जो दिखाये बस ज़बानी ख़ैरख़्वाही

आँसुओं से तर किये हैं लब ख़ुशी ने
वे न रूखी दें सकेंगे अब गवाही

पाक दामन है व करता जाये तौबा
जग लुँढ़ाकर नित गुनाहों की सुराही

वक़्त की क़ीमत वही अब है समझता
एक पल को जो मिलेगा हर छमाही

जा पहुँचता दिल उसी मजमून पर क्यों
ख़ास जाने की जहाँ पर है मनाही

क्या कभी लौटा सकोगे वह ज़माना
वक़्त ने की थी कभी जिसकी तबाही

हर तमन्ना को बनाता जाये मलिका
हरकतें दिल की हुई हैं बादशाही


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