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03.18.2014

बूँद-बूँद आकाश
डॉ. गौतम सचदेव
059

क्या करे कोई अगर दिल आये तो

क्या करे कोई अगर दिल आये तो
फूल ख़ुश्बू भेजकर बुलवाये तो

आप के वादे बड़े मालूम हैं
क्या करेंगे कल अगर पछताये तो

ज़िंदगी की धूप ढल सकती नहीं
फ़िक्र के लम्बे न हों गर साये तो

रास्ता कोई न मुश्किल है कहीं
पाँव अपना गर न ठोकर खाये तो

आपको किस मुँह से बेगाना कहें
यार अपना ही न जब अपनाये तो

काँच से भी दिल अधिक कमज़ोर है
बात का पत्थर अगर लग जाये तो

मुल्क यह इंग्लैंड भी रंगीन है
रंग नस्लों के नहीं मिटवाये तो

क्यों न हम इस शहर को अपना कहें
जब पड़ोसी तक नहीं हमसाये तो


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