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05.03.2012
बूँद-बूँद आकाश
डॉ. गौतम सचदेव
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हर आदमी दिखा कुछ बीमार आदमी
डॉ. गौतम सचदेव


हर आदमी दिखा कुछ बीमार आदमी
जाने न आदमी के किरदार आदमी

दे अम्न की दुहाई तलवार आदमी
है बर्फ़ एक पल में अंगार आदमी

हैवान भी न पूरा इनसान भी नहीं
हो जाए रहमदिल भी ख़ूँख़्वार आदमी

ताज़ा दिखाई देता बनकर ख़बर नई
अन्दर वही पुराना अख़बार आदमी

बेचे ज़मीर को ख़ुद हर दिन बिना डरे
रंगीन माल फीका बाज़ार आदमी

मेहमान जानता सब रह जायेगा यहीं
पत्थर के चाह्ता घर दीवार आदमी

मिट्टी को बाँटने से इनसान क्यों बँटें
बन जाये क्यों दिलों में दीवार आदमी

सब जाम ज़िंदगी का पीकर यही कहें
बेकार ज़िंदगी है बेकार आदमी


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