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05.03.2012
बूँद-बूँद आकाश
डॉ. गौतम सचदेव
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उमड़ा है बरस पाये न बादल मेरे मन में
डॉ. गौतम सचदेव


उमड़ा है बरस पाये न बादल मेरे मन में
गीला-सा सुलगत रहे जंगल मेरे मन में

नन्ही-सी तमन्ना कभी झाँके जो नज़र से
ये ओंठ लगा जाते हैं साँकल मेरे मन में

आया था कभी चोर इरादे की तरह वो
आहट-सी गया छोड़ के हर पल मेरे मन में

किरणों में उमड़ता है मचलता है लहर में
आँखों से ढुलकता हुआ काजल मेरे मन में

जीवन का नगीना हुआ सपनों का सितारा
ख़ुश्बू-सा उड़ा दर्द का आँचल मेरे मन में

फ़ुर्सत नहीं चाहत का ये मौक़ा भी नहीं है
क्यों बोल रही याद की कोयल मेरे मन में


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