अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
05.03.2012
बूँद-बूँद आकाश
डॉ. गौतम सचदेव
31

सपने सिर्फ़ नहीं सपने
डॉ. गौतम सचदेव


सपने सिर्फ़ नहीं सपने
अपने हैं किसके अपने

दिल फूला फैली ख़ुश्बू
बिंधने पर लगता डसने

वह जाने वह कैसा है
भोले नाम लगे जपने

पलकों ने पल-पल रोका
मन गुस्ताख़ लगा तकने

दर्द नहीं तो क्या लिखना
सब कैसे लगते छपने

कुन्दन बन तब है प्यारे
यों ही क्यों लगता तपने

मिट्टी ने डाले फंदे
लोग कहें आये बसने

रात हमेशा अपनी है
नींद पराई क्या सपने

मीठे मौसम बीत गये
आये थे वे दिल रखने


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें