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05.03.2012
बूँद-बूँद आकाश
डॉ. गौतम सचदेव
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तारीफ़ से भरपूर इक पर्चा पढ़ा गया
डॉ. गौतम सचदेव


तारीफ़ से भरपूर इक पर्चा पढ़ा गया
मुजरिम दिखाने के लिए किस्सा गढ़ा गया

इन्सानियत के रोज़ सब पन्ने पलट गये
पूरा सबक लेकिन कहाँ किससे पढ़ा गया

क्यों खाइयों में लोग कुछ छोड़े गये सदा
ऊपर न जीते-जी कभी जिनसे चढ़ा गया

कटने लगी अपनी ज़बाँ अपनी ज़बान से
उस्ताद यह कैसी हमें पट्टी पढ़ा गया

उपदेश तूने रामजी अच्छा दिया हमें
आये ज़रा हम पास तो दूरी बढ़ा गया


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