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05.03.2012
बूँद-बूँद आकाश
डॉ. गौतम सचदेव
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अलस मादकता भरे आये दिवस उल्लास के
डॉ. गौतम सचदेव


अलस मादकता भरे आये दिवस उल्लास के
छा गये दिल पर सुनहरे फूल अमलतास के

इत्र बनकर उड़ रहा आँचल किशोरी वायु का
राग छेड़ें धड़कनें चुम्बन सतत मधुमास के

मगन मन गोपाल जैसे बन गया है ख़ुद समय
गोपियाँ ऋतु माधवी हैं दृश्य लीला रास के

चूमते खुलकर सवेरे लाज से शामें झुकीं
ख़ुश्बुएँ पीकर बहकते घन अँगूरी प्यास के

चाँदनी का रजत आँचल ढरकता मिल चाँद से
खुल गये मानो झरोखे मुग़लिया रनिवास के

हाथ में ले हाथ चलते हैं कहीं मंज़िल नहीं
बालपन के प्रेम जैसे दिन फिरे इतिहास के

फूल सपने चाँदनी संगीत आँचल रेशमी
मिल रहे दिल को सहज ही साथ में सहवास के


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