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05.03.2012
बूँद-बूँद आकाश
डॉ. गौतम सचदेव
019

जहाँ तेरा नक़्शे-क़दम
डॉ. गौतम सचदेव


जहाँ तेरा नक़्शे-क़दम देखते हैं*
सितम देखते हैं करम देखते हैं
नक़्शे-क़दम=चरण चिह्न, करम=कृपा

हमें शिकायत कि हम कम देखते हैं
उन्हें है शिकायत कि हम देखते हैं

ये वादा किया था कभी ख़ंदःलब ने
करेगा वो रहमो-करम देखते हैं
ख़ंदःलब=मुस्कुराते ओठों वाला

किसी से मिले थे मगर हो गया क्या
कि ह्र दिल में तेग़े-दुदम देखते हैं
तेग़े-दुदम=दुधारी तलवार

बनाने लगे ओग मन्दिर सुनहरे
परस्तिश में अब वो रक़म देखते हैं

नई सुब्‍ह होगी ये उम्मीद कम है
मगर हम उफ़ुक़ दम-ब-दम देखते हैं

बिछड़कर ख़ुशी गुम हुई थी जहाँ पे
उसे क्यों उसी जा पे हम देखते हैं

*यह मिस्रः मिर्ज़ा ग़ालिब का है।


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