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05.03.2012
बूँद-बूँद आकाश
डॉ. गौतम सचदेव
013

काँटों पर शबनम
डॉ. गौतम सचदेव


काँटों पर शबनम
चुभती है पूनम

जागी है रो कर
पीड़ा की सरगम

सीला मन दामन
दुखता है मौसम

काँटों की सीवन
छालों की जाजम

आँखों में जगमग
यादों का नीलम

छीजे दुख से सुख
सुख में दुख मरहम

तन्हा है घिर कर
जमघट में ’गौतम’


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