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05.03.2012
बूँद-बूँद आकाश
डॉ. गौतम सचदेव
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आज़ादी नेता ने खाई
डॉ. गौतम सचदेव


आज़ादी नेता ने खाई बाक़ी सब उपवासी
भारत माता के दफ़्तर में जनता है चपरासी

बाँझ हुई मिट्टी यह बुढ़िया अवतारों की जननी
गंगा मन की गँदली तन की क्यारी भूखी-प्यासी

कैकेयी के वंशज ने थी पूजी भले खाड़ाऊँ
जूते सिर पर रखने में क्या खुश हों भारतवासी

नित्य मनायें रामभक्त अब रामराज हो ऐसा
हारें भरत चुनावों में बस राम रहें वनवासी

जात-पाँत व धर्म प्रांत के झंडों पर हैं नारे
राधा को कशमीरी कहते कान्हा को मद्रासी

नित्य नये भगवान कराएँ पूजा निशि-दिन अपनी
सत्ता की कुटिया बनवायें सोने से संन्यासी

नोटों की ख़श्बू से फूले सब दल महक रहे हैं
नये उसूलों के गुलदस्ते लगते कितने बासी

लोकतन्त्र के आस्मान का चाँद कलंकित लगता
अर्द्धशती के बाद सजी बस आधी पूरनमासी


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