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05.03.2012
बूँद-बूँद आकाश
डॉ. गौतम सचदेव
003

ग़ैर को अपना बनाकर देख लो
डॉ. गौतम सचदेव


ग़ैर को अपना बनाकर देख लो
कुछ हमें भी आज़माकर देख लो

तुम बसाओगे न आँखों में हमें
पर ज़रा दिल में बसाकर देख लो

दिन ख़यालों में बिताते हो सदा
रात आँखों में बिताकर देख लो

तर हुई आँखें ख़ुशी में किस लिए
फूल से शबनम उठाकर देख लो

राज़ चेहरे से प्रकट हो जायेगा
यों छुपाने को छुपाकर देख लो

कल भले घुत कर तुम्हें मरना पड़े
आज थोड़ा गुनगुनाकर देख लो

ज़िंदगी के साथ क्या-क्या दफ़्न है
वक़्त के पत्थर हटाकर देख लो


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