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05.03.2012
बूँद-बूँद आकाश
डॉ. गौतम सचदेव
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चोट का तक़ाजा है
डॉ. गौतम सचदेव


चोट का तक़ाजा है ओंठ भींच रोक चीख़
पाल आँच पीड़ की पकने का सबक सीख

मीठा मत बन इतना जाएँ सब तुझे हड़प
प्यारे वे पेरेंगे मान तुझे नरम ईख

प्यार फूल होता है प्यार बाँट ख़ुश्बू बन
भूल दर्द काँटों का मान की न माँग भीख

सींच ख़ुशी ज़ख़्मों में और हँसे तू भी हँस
दर्द सौंप दे दिल को रो भीतर कुशल दीख


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