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05.03.2012
अन्तर्यात्रा
रचनाकार : डॉ. दीप्ति गुप्ता

तलाश
डॉ. दीप्ति गुप्ता


जब-जब मैंने
जीवन की सम्पूर्णता
और
अर्थवत्ता को खोजना चाहा
तब-तब अपने अस्तित्व को
अधूरा और अर्थहीन पाया;
सदियों से चली आ रही
मान्यताओं और रीतियों पे
मुझे विश्वास नहीं
और
अपना विश्वास
मुझे मिल पा रहा नहीं;
मुझे एक आसमां की तलाश है,
जो अभूतपूर्व सुख-सौन्दर्य
और
आनन्द से भरपूर हो,
जो मेरी चेतना को प्रखर,
सम्वेदना को गहन और
जीवन शैली को ऊर्ध्दवगामी बनाए,
जो मुझे अपने
सुरक्षित साए में समेट कर दे –
अभय दान.........!
सपनों के आकाश को पाकर,
क्या जावन की सम्पूर्णता,
अर्थवत्ता पलकों पे थिरकती हुई
मेरी आँखों में समा जायेगी ?

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