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05.03.2012
अन्तर्यात्रा
रचनाकार : डॉ. दीप्ति गुप्ता
सपने
डॉ. दीप्ति गुप्ता

अजनबी चेहरों में, अपनों को ढूँढ़ते हो
सहरा में क्यों गुलिस्तां खोजते हो
बंजर जमीन में, फूलों को रोपते हो
प्यार बेवफा से, वफा की सोचते हो
आँखों में कोहरा, क्यूँ सितारों को खोजते
हो दोस्ती बदकिस्मती से, किस्मत को कोसते हो
खिजाओं को न्योत के, बहारों की सोचते हो
संगदिल जमाने के संग खुशियों की सोचते हो


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