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| 10.30.2007 |
| अन्तर्यात्रा रचनाकार : डॉ. दीप्ति गुप्ता |
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मुक्तक डॉ. दीप्ति गुप्ता |
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1 2 सावन में मेघा छाए 3 टूटे दिल के बंधन होते हैं 4 क्षिति की क्षति |
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