अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
05.03.2012
अन्तर्यात्रा
रचनाकार : डॉ. दीप्ति गुप्ता
खेद
डॉ. दीप्ति गुप्ता

सही राह पर चलने वाले
पक्ष न्याय का लेने वाले
क्यों खड़े देखते रहते हैं ?
बातें समझाते रहते हैं ..
इतने में हो जाते वार
निर्दोषों का नरसंहार !


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें