उजला दिन
अँधियारी रात ये दोनों जीवन के साथ
उत्थान, पतन, अपमान –
मान रंगीन जश्न, सूना श्मशान ढलता सूरज, उगता चाँद कहता हमसे, यह लो मान सुख-दुख जीवन के दो पहलू एक आता, दूजा छुप जाता
इस चक्र में बँधा
संसार यह नियम, संसृति – आधार पतझड़, मधुमास, ज्यैष्ठ, आषाढ़ सर्दी में कोहरे की चादर गर्मी में तारों की रात घूम-घूम कर आती जाती जीवन - मृत्यु,
जीत और हार तटस्थ भाव से जीना रहना यही है, इस जीवन का सार!