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05.03.2012
अन्तर्यात्रा

 


डॉ. लुदमिला खोकलॅव
हिन्दी विभागाध्यक्ष
मास्को विश्वविद्यालय
मास्को
, रूस.

 अभिनन्दन

      दीप्ति तुम्हें तुम्हारे प्रथम काव्य संग्रह के विमोचन के अवसर पर हार्दिक बधाई !!! अपने शिल्प और भाषा-शैली में तुम्हारी कविता अपने समकालीन कवियों की कविता से एकदम भिन्न है। सम्वेदना का फैलाव इतना अधिक है कि तुम्हारी कविता में अदम्य जिजीविषा दिखाई देने लगती है। तुमने कविता को बारीक से बारीक सम्वेदना की अभिव्यक्ति का ऐसा जीवन्त और शक्तिशाली माध्यम बना दिया है, जो

      आज की हिन्दी कविता में अद्वितीय दिखाई देता है। करूणा की जो माधुरी तुम्हारी कविताओं में झलकती है, वह निःसन्देह अद्भुत है। दीप्ति तुम्हारी कविताओं में कथन की सादगी है, एकदम सटीक उपमाएँ हैं, और यथार्थग्रही सम्वेदना है, जो मन पर अमिट छाप छोड़ती हैं। एकबार फिर तुम्हें बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएँ !!

लुदमिला खोकलॅव

                            

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