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12.25.2008

आओ सुनाऊँ एक कहानी
रचनाकार
: सीमा सचदेव

वफादार कुत्ता और बिल्ली
सीमा सचदेव

इक साहब के शौक निराले
कुत्ता बिल्ली घर में पाले

उसका इक मुन्ना भी प्यारा
जो साहब का राजदुलारा

वो तीनों ही मिलकर रहते
आँगन कभी बगिया में खेलते

जब मुन्ने को नींद आ जाती
बिल्ली प्यार से उसे सुलाती

कुत्ता उसकी रक्षा करता
पास में बस बैठा ही रहता

इक दिन जब वो सो गया था
और सपनों में खो गया था

साँप एक वहाँ पर आया
मुन्ने को देख के फन फैलाया

अब तो कुत्ता लगा भौंकने
जैसे तैसे साँप को रोकने

सुनकर बिल्ली भाग के आई
साँप के संग की लड़ाई

साँप तो बिल्ली के ऊपर लिपटा
बिल्ली ने उसे दाँतों से काटा

साँप तो लहु-लुहान हो गया
और वही बेहोश हो गया

कुछ ही पल मे दम भी तोड़ा
तब बिल्ली ने उसको छोड़ा

मुन्ने की भी जान बचाई
और मालिक संग की वफाई


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