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12.25.2008

आओ सुनाऊँ एक कहानी
रचनाकार
: सीमा सचदेव

चीनू-मीनू
सीमा सचदेव

चीनू-मीनू दो सहेली
नहीँ रहती थी कभी अकेली

दोनो ही थी बड़ी स्यानी
आओ सुनाऊँ उनकी कहानी

दोनों पास-पास ही रहतीं
एक ही कक्षा में थी पढ़तीं

चीनू को मिलता एक रुपैया
मीनू को भी एक रुपैया

दोनों ने सोचा कुछ मिलकर
पैसे जोड़ें सबसे छुपकर

दोनों ने इक-इक डिब्बा ढूँढा
सबसे उसे छिपाकर रखा

आठ-आठ आना दोनों बचा के
रख देतीं वो सबसे छुपा के

दोनों ने जोड़े कुछ पैसे
बचा-बचा के जैसे तैसे

स्कूल में कुछ बचे थे ऐसे
जिनके पास नहीँ थे पैसे

न कॉपी, पेन्सिल न बस्ते
घर का काम वे कैसे करते?

टीचर उनको रोज पीटते
पर बच्चे थे, वे क्या करते?

चीनू-मीनू ने घर पे बताया
और पैसों का डिब्बा दिखाया

दोनों बच्चियाँ भोली-भोली
पैसे दे कर ये थी बोली

बच्चों के पास नहीं हैं पैसे
क्यों न उनको ले कर दे दें

कुछ कॉप, पेन्सिल और बस्ते
ता कि पढें वो हँसते-हँसते

सबको उनका विचार भा गया
और सारा सामान आ गया

मिल गया बच्चो को सामान
बन गई माँ-बाप की शान

सबको उन पर गर्व हुआ था
उनका उँचा नाम हुआ था


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