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12.25.2008

आओ सुनाऊँ एक कहानी
रचनाकार
: सीमा सचदेव

शेर और कुत्ता
सीमा सचदेव

आओ बच्चो सुनो कहानी
न बादल न इसमें पानी

इक कुत्ता जंगल में रहता
और स्वयम्‌ को राजा कहता

मैं सबकी रक्षा करता हूँ
और न किसी से मैं डरता हूँ

बिन मेरे जंगल है अधूरा
असुरक्षित पूरा का पूरा

मुझ पर पूरा बोझ पड़ा है
मेरे कारण हर कोई खड़ा है

मैं न रहूँ, न रहेगा जंगल
मुझसे ही जंगल मे मंगल

सारे उसकी बातें सुनते
पर सुन कर भी चुप ही रहते

समझें स्वयम्‌ को सबसे स्याना
था अन्धों में राजा काना

पर यह अहम भी कब तक रहता
कब तक कोई यह बातें सुनता

इक दिन टूट गया अहंकार
जंगल में आ गई सरकार

बना शेर जंगल का राजा
खाता पीता मोटा ताजा

शेर ने कुत्ते को बुलवाया
और प्यार से यह समझाया

छोड़ दो तुम झूठा अहंकार
और आ जाओ मेरे द्वार

बिन तेरे नहीं जंगल सूना
यह तो फलेगा फिर भी दूना

पर कुत्ते को समझ न आई
उसने अपनी पूँछ हिलाई

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"मैं यहाँ पहले से ही रहता
हर कोई मुझको राजा कहता

कौन हो तुम यहाँ नए नवेले
अच्छा यही, वापिस राह ले ले"

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ले लिया उसने शेर से पंगा
मच गया अब जंगल में दंगा

भागे यहाँ वहाँ बौखलाया
खुद को भी कुछ समझ न आया

जो अन्धों में राजा काना
समझता था बस खुद को स्याना

अब तो वही बना नादान
शेर के हाथ में उसकी जान

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छुप कर गया शेर के पास
बोला मैं जानवर हूँ खास

न बदनाम करो अब मुझको
राजा मैं मानूँगा तुझको

बख्श दो मुझको मेरी जान
नही करूँगा मैं अभिमान

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शेर ने कुत्ते को माफ कर दिया
और अपना मन साफ कर दिया

तोड़ा कुत्ते का अभिमान
और बख्श दी उसको जान


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