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12.25.2008

आओ सुनाऊँ एक कहानी
रचनाकार
: सीमा सचदेव

चिंटू- मिंटू
सीमा सचदेव

चिंटू-मिंटू जुड़वाँ भाई
एक ही सूरत दोनों ने पाई

करते बच्चों संग लड़ाई
जिससे उनकी माँ तंग आई

पापा उनको बहुत रोकते
पर दोनों ही अकल के मोटे

टीचर भी उनको रोज समझाती
पर दोनों को समझ न आती

किसी न किसी को रोज पीटते
और कक्षा में हल्ला करते

सारे उनसे नफ़रत करते
उनकी मार से सारे डरते

बीमार पड़ा था इक दिन चिंटू
गया स्कूल अकेला मिंटू

बच्चों ने तरकीब लगाई
और मिंटू को सबक सिखाई

कोई भी उससे नहीं बोलेगा
बैठेगा वो आज अकेला

न कोई उस संग लंच करेगा
न उसके संग कोई खेलेगा

मिंटू ने थोड़ा समय बिताया
और फिर जा बच्चों को बुलाया

सभी ने उससे मुँह था फेरा
देखता रह गया वो बेचारा

किसी तरह से दिन बिताया
और फिर जब घर वापिस आया

बैठ गया था घर के कोने
लगा था ज़ोर-ज़ोर से रोने

मिंटू बोला क्या हुआ भाई?
किसी ने तुझसे की लड़ाई?

जल्दी से तू कहदे मुझसे
बदला लूँगा अभी मैं उससे

मिंटू बोला न मेरे भाई
बंद करो अब सारी लड़ाई

अब हम नहीँ लड़ेंगे किसी से
मिलजुल कर ही रहेंगे सबसे

मिंटू ने सारी बात बताई
चिंटू को भी समझ में आई

दोनों बन गये अच्छे बच्चे
सारे बन गये दोस्त सच्चे

बच्चो तुम भी मिलकर रहना
कभी न किसी से झगड़ा करना


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