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03.08.2009

लोक-कथा

अ-आ, इ-ई, उ-ऊ, ए-ऐ, ओ-औ, , ख्, , , , , , , , , , , , , , , , , , , , म, , , , , श-ष, , , क्ष, त्र, ज्ञ, , श्र-श्रृ
     
17 हाथी 99 का चक्कर  
अ-आ इ-ई उ-ऊ
अपना हाथ जगन्नाथ
अपने अपने करम
   
ए-ऐ ओ-औ
    कन्हैया की हाज़िर जवाबी
कठपुतली का नाच
कभी किसी को कमज़ोर मत समझो
करत-करत अभ्यास ते
 
 
 
चतुर राज ज्योतिषी
चावल बन गया धान
 छोटा नहीं है कोई
जंगल के दोस्त
जैसी तुम्हारी इच्छा
जैसे को तैसा
  टेढ़ी खीर  
    तीन पुतले
तेरी दुनिया बहुत निराली है
देनेवाला जब भी देता, देता छप्पर फाड़ के  भोजपुरी लोककथा
पहले मैं तो छोड़ के देखूँ
बड़ा कौन - लक्ष्मी या सरस्वती
बापू उसे मत फेंकना तुम्हारे काम आएगा
भाग्य का लिखा टल नहीं सकता मेहनत की कमाई
लक्ष्मी का आवास और प्रवास
श-ष
  सच्चा सोनार
सोने की चमक
 
क्ष त्र

हथेली पर बाल
हर काम अच्छे के लिये होता है

 
ज्ञ श्र-श्रृ
     
17 हाथी