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05.07.2008

लोक-कथा

अ-आ, इ-ई, उ-ऊ, ए-ऐ, ओ-औ, , ख्, , , , , , , , , , , , , , , , , , , म, , , , , श-ष, , , क्ष, त्र, ज्ञ, , श्र-श्रृ
     
अ-आ इ-ई उ-ऊ
अपना हाथ जगन्नाथ
अपने अपने करम
   
ए-ऐ ओ-औ
    कभी किसी को कमज़ोर मत समझो
 
 
 
चतुर राज ज्योतिषी  छोटा नहीं है कोई
जंगल के दोस्त  
  टेढ़ी खीर  
     
पहले मैं तो छोड़ के देखूँ
बापू उसे मत फेंकना तुम्हारे काम आएगा भाग्य का लिखा टल नहीं सकता मेहनत की कमाई
     
लक्ष्मी का आवास और प्रवास
श-ष
  सोने की चमक  
क्ष त्र

हथेली पर बाल
हर काम अच्छे के लिये होता है

 
ज्ञ श्र-श्रृ
     
17 हाथी