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| 09.24.2007 |
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कल गए थे जिसे बीमार-ए-हिज्रां छोड़ कर ’ज़ौक़’ मोहम्मद इब्राहिम |
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कल गए थे जिसे बीमार-ए-हिज्रां छोड़ कर
बीमार-ए-हिज्रां=विरह का रोगी
तिफ़्ल-ए-अश्क ऐसा गिरा दामन-ए-मिज़्शगां छोड़ कर
तिफ़्ल-ए-अश्क=बच्चों जैसे आँसू;
मिज़्शगां=पलकें
सर्द-मेहरी=उदासी; अब्र-ए-बहारां=वसन्त के बादल
गर ख़ुदा देवे क़नअत माह-ए-यक-हफ़्ता की तरह
माह-ए-यक-हफ़्ता=आठवीं का चाँद |
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