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| 09.04.2007 |
| मेरे बाद किधर जाएगी तन्हाई ज़फ़र गोरखपुरी |
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मेरे बाद किधर जाएगी तन्हाई
मैं जो मरा तो मर जाएगी तन्हाई मैं जब रो रो के दरिया बन जाऊँगा उस दिन पार उतर जाएगी तन्हाई तन्हाई को घर से रुख़्सत कर तो दो सोचो किस के घर जाएगी तन्हाई वीराना हूँ आबादी से आया हूँ देखेगी तो डर जाएगी तन्हाई यूँ आओ कि पाओं की भी आवाज़ न हो शोर हुआ तो मर जाएगी तन्हाई |
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