दीवान
क्या
उम्मीद करें उनसे
जब मेरी याद सताए तो
दिन को भी इतना
अन्धेरा है
धूप क्या है और साया क्या
मजबूरी के मौसम में
मिले किसी से नज़र तो
मेरे बाद
किधर जाएगी तन्हाई
मौसम को इशारों से
हमेशा है
वस्ल-ए-जुदाई