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ISSN 2292-9754

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01.22.2016


ऊष्मा

मैं अब भी
थोड़ा सा शेष हूँ
हो सके, तो रोक लो
अपनी आवाज़ से छूकर
तुम्हारे अभाव
उपजती हुई ऊष्मा में
मेरा निरंतर पिघलना


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