अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
01.22.2016


टीस

मैंने साँस भी नहीं ली
उस समय, जब तुम गोद में थे
सिर्फ़ इसलिए, कि तरंगे साँसों की
कहीं तोड़ ना दें क्रम
तुम्हारी नींद में उतरती हुई
सफ़ेद पोशाक पहनी परियों का

मैंने कोई अपेक्षा नहीं की
और ना ही रखी, कोई अबोली इच्छा
फिर क्यों, मन में
घास की तरह, स्वतः उग आए
सपनों के निःश्वास हो जाने पर
उठती है एक टीस


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें