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ISSN 2292-9754

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03.14.2016


ज़िंदगी ने जो दिया

ज़िंदगी ने जो दिया, हम ने सदा हँस कर लिया।
अमृत मिला या विष मिला, बेझिझक उसको पिया॥

दुश्मनों ने राह में, काँटे बिछाए रात-दिन,
हम सदा चलते रहे, कांपा नहीं अपना हिया॥

धोखे मिले हर बात में, आँसू भी अक्सर आ गए,
फिर भी हम ने यार पर, विश्वास हर दम ही किया॥

जो भी कमाया, लुट गया, मुफ़लिसी में जी लिए,
आया जो कोई द्वार पर, सत्कार उसको नित दिया॥

मुस्कुराए चोट खा कर, उफ़ तक न की जुबान से,
ग़म छिपाकर 'अरुण' दिल में, घाव दुश्मन का सिया॥


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