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ISSN 2292-9754

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10.31.2014


चिंतन से जीवन भर लो

चिंता को छोड़ो, चिंतन से जीवन भर लो!
क्यों पीते हो ज़हर, स्वयं को अमृत कर लो!!

चिंता चिता समान जगत में,
चिंतन ही अमृत देता है!
तन-मन पावन हो जाते हैं,
ज्योति ऐसी भर देता है!!

संदेह छोड़ कर, विश्वासों से मन भर लो!,
क्यों पीते हो ज़हर, स्वयं को अमृत कर लो!!

संदेहों से अँधा हो जाता जीवन,
उजियारा विश्वासों से ही मिलता है!
छोड़ो अंध-कूप में नित डूबे रहना,
हृदय-कमल तो विश्वासों में खिलता है!!

स्वार्थ छोड़ कर,परोपकार से जीवन भर लो!
क्यों पीते हो ज़हर, स्वयं को अमृत कर लो!!

जीकर अपने लिए मिलेगा क्या बोलो,
खुशियाँ देकर ही तो खुशियाँ पाओगे!
जिस पल जी लोगे दूजों की ख़ातिर तुम,
उस पल समझो अमृत ही हो जाओगे!!

अहं छोड़ कर, विनय से यह जीवन भर लो!
क्यों पीते हो ज़हर, स्वयं को अमृत कर लो!!


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