डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा ’अरुण’

कविता
कोख में पलती बेटी बोली
चिंतन से जीवन भर लो
छलनी लेकर हाथों में : गीत
ज़िन्दगी का सच
ज़िंदगी ने जो दिया
जीवन-नदिया
जीवन-यात्रा का पाथेय
दूर चले आए अपनों से
प्यार किया है मैंने
माता-पिता की महिमा (दोहे)
वरदान क्या माँगूँ
सब के हो जाओगे
सृजनशील दो हाथ
स्वीकार कर लो
दीवान
गर बेटियों का कत्ल यूँ ही
ज़िंदगी चलती रहेगी
कहानी
मुस्कुराती ज़िंदगी
बाल-साहित्य
मम्मी मेरा बैग मँगा दो
बुद्धिमान शिष्य - बाल-कहानी