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ISSN 2292-9754

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07.02.2014


यह सड़क आम है

यदु जोशी ‘गढ़देशी’
यह सड़क उसकी है न मेरी है
यह सड़क सबकी है
सड़क उस गिलहरी की है
जो सड़क के बीच
जश्न में शामिल हुई है अभी
सडक उन चींटियों की है
जिन्होंने इसे बना दिया है स्थाई निवास
यह सड़क उस औरत की है
जिसे चिंता है खेत-खलिहान जाने
और घर लौट आने की
सड़क उस चाँद की है
जो चलता है
एक परिपाटी को निभाते हुए
एक छोर से दूसरे छोर तक एक साथ
सड़क कच्ची है या कि पक्की
सीधी या टेढ़ी-मेढ़ी
यह मायने नहीं रखती
सड़क सबको साथ लिए चलती है
पहुँचती है घर के मुहाने तक
इसी सड़क से ही हम तय करते हैं
नई मंज़िलें, नए मुकाम
सड़क कराती है नित नये-पुराने
चेहरों से साक्षात्कार
इसीलिए शायद इस सड़क के लिए
घर्षण, तपन, बरसात सभी हैं स्वीकार
तभी सड़क होती है ख़ास
हम सबके लिए …


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