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ISSN 2292-9754

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05.20.2017


आया नया विहान

राम राज सा धरा-धाम हो
कान्हा का रंग-रास,
डाल-डाल पर फूल खिले
रहे सदा मधुमास।

राग-द्वेष-घृणा हटे
बहे प्रेम की गंगा,
रहे नहीं अवसाद धरा में
मन हो सबका चंगा।

निर्भय हो जन-जन का मन
बढ़े देश की शान,
दरवाज़े पर दस्तक देने
आया नया विहान।


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