डॉ. विवेक कुमार

कविता
आया नया विहान
इच्छाओं की गगरी
कभी-कभी
जीवन का गणित
तुम्हारे आने से
बहुत दिनों के बाद...
बेटियाँ
विछोह का विष
सूरज तुम पलायन नहीं कर सकते...