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ISSN 2292-9754

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10.11.2014


आओ दीप जलायें

 आओ दीप जलायें
दीपावली मनायें॥

आज राम आये निज धाम
निपटा करके सारे काम
जननिजन्मभूमिश्च... का मंत्र
हम सब भी अपनायें॥
आओ दीप जलायें...

स्नेह -प्रेम का हो उजाला
द्वेष- भाव का हो मुख काला
समरसता की बने मिठाई
एकता के मोदक खायें॥
आओ दीप जलायें...

ये दिवले, ना बुझ पायें
कैसे भी झंझावत आयें
चले अनार, बम, फुलझड़ियाँ
आतंकवाद मिटायें॥
आओ दीप जलाये
दीपावली मनायें॥


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