विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र'

लघु कथा
अजीब-चमक
अरे कोई तो बतलाओ
आँसू
उठो जागो...(गीत)
औकात
खिंचाव
तिये के चावल
तिरंगे की व्यथा
भिखारी
मास्टर जी
कविता
अर्थ छिपा ज्यूँ छन्द - (दोहे)
आओ दीप जलायें
कहाँ गया बचपन...
राणा तुमको शत-शत प्रणाम..
वो नदी सी
सुन्दरता
हास्य-व्यंग्य
बारात के घोड़े...