अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
03.23.2016


प्रेम का रंग

भरकर हृदय में प्रेम का रंग
अपनी मीठी बोली में
आ खेल ले रंग
मेरे संग होली में

समय नही बेरंग
गुमसुम उदास जीने का
मौका है दुख को पछाड़
दर्द और ग़म पीने का

मेरी भावनाओं का रंग
जब तन से अन्तर्मन तक जाएगा
देखना तुम
उत्साह उल्लास के साथ
मन भी फाग गाएगा
फिर कितना भी दुख हो
जीवन की फगुनाई में

डाल देना हँसी का मदमस्त रंग
इस काली परछाई में
देखकर जिंदगी भी
करेगी मनभावन रंगो की बौछार
कहेगी तुमसे खेलो तुम खेलो
जमकर रंगों का त्यौहार


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें