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ISSN 2292-9754

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10.22.2014


जगमग करता दीप

जगमग करता दीप
बूँद के नीचे सीप
सीप में लहराता सागर
जैसे नटवर नागर
नागर और हम
प्रकाश व तम
तम माँगे प्रकाश
तंत्र से जन आस
आस लिये वादा
कृष्ण और राधा
राधा चाहे श्याम
सीता मांगे राम
राम हमारा जीवन
जीवन सुंदर मन
मन मस्त राजन
सावन सा पावन
पावन सी ममता
जोगी जैसे रमता
रमता जब जोगी
मुक्त होता योगी
योगी जीवन योग
सहज सरल तू भोग


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