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| 04.04.2009 |
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बढ़े बालों से योग प्रशिक्षण के रिश्ते वीरेन्द्र जैन |
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इन दिनों
योग बहुत फरफरा रहा हैं। जिसे देखों वही हाथ,
पाँव,
गर्दन,
पेट,
पीठ,
आदि ऊँचा नीचा आड़ा तिरछा करने में जुटा हुआ है। लोग सासों पर साँसे लिये
चले जा रहे है। और ज़ोर ज़ोर से लिए चले जा रहे हैं। अब कोई नहीं कहता कि
गिनी चुनी साँसें मिली हैं अगर जल्दी जल्दी ले लोगों तो जल्दी राम (देव)
नाम सत्य हो जायेगा। ऐसा लगता है जैसे- जल्दी जल्दी लेकर साँसों का हिसाब
रखने वाले को गच्चा देने की कोशिश कर रहे हों। वह पूछता होगा कि आज कितनी
लीं,
तो
योग करने वाला,
सात हज़ार लेकर कहता होगा कि,
पाँच हज़ार ही ली हैं महाराज !
बच्चे,
बूढ़े,
औरतें सब एक छोटे से ड्राइंग रूम में टी.वी. के सामने लद्द पद्द हुऐ जा रहे
हैं किसी की टाँग उत्तर को
जा रही है तो किसी का सिर रसातल की ओर जा रहा है। शरीर का कोई भी भाग किसी
भी दिशा में असामान्य तरीके से मोड़ा
जाये या मोड़ने का प्रयास किया जाये तो उस क्रिया को किसी आसन का नाम
दिया जा सकता है,
जिसे वे लोग कर रहें हैं। चैन की नींद सोये हुए बच्चों को उठा कर उससे योग
कराया जा रहा है तथा गुस्से में वह जो लात घूँसे
फटकार रहा है उसे शायद लन्तंग फन्तंग आसन कहते होंगे । बाबा जी देख
सकते तो धीर गंभीर स्वर में बतलाते कि यह आसन बहुत उपयोगी है,
इसके करने से शरीर में उत्पन्न आवेश बाहर निकलता है और थोड़ी देर में चित्त
शांत हो जाता है। मैने भी एक बार मेहमाननवाज़ी करते हुये मेज़बानों की खुशी
के लिए उनके साथ टी.वी के सामने आसन करने का धर्म निभाया था पर ऐसा करते
समय मेरी लात सीधे बाबा जी के मुँह में
लगी और वे अर्न्तध्यान हो गये। मैं समझा कि बुरा
मान गये हैं और मुझे शाप देने के लिए शब्द कोश देखने चले गये होंगे
पर समझदार मेज़वान ने अपने अनुभवी परीक्षण के बाद बताया कि ऐसा नहीं है
अपितु सच्चाई यह है कि तुम्हारे पाद प्रहार से टी.वी फुक गया है।
रही बाबा जी की बात सो वे अभी भी पड़ोसी के यहाँ सिखला रहें है। मैने
शर्मिन्दा होना चाहा पर सच्चे मेजबान ने मुझे शर्मिन्दा नही होने
दिया अपितु छत पर सूख रहें मेरे एक जोड पेंट शर्ट को बन्दर द्वारा
ले जाना घोषित कर दिया।
योग में
हस्त एवं पद का यहाँ वहाँ फटकारे जाने को तो किसी न
किसी र्तर्क में फिट किया जा सकता है पर उसका बालों से क्या सम्बंध
है ये मैं अभी तक नहीं समझ पाया। मैंने टी.वी. पर जितने भी योग गुरू देखे
उनके बालों और दाढी को स्वतंत्रता पूर्वक फलते फूलते देखा। यदि
किसी की दाढ़ी नही बड़ी होती तो बाल बड़े होते हैं। मुझे नहीं पता कि
क्या बालों से हाथ पाँव ठीक चलते हैं या साँसें तेजी से बहती हैं। आखिर कुछ
तो होगा जो ये लोग बाल और दाढ़ी बढ़ाये मिलते हैं। हो सकता है ठीक तरह से योग
करने पर बाल तेजी से बढ़ते हों। मुढ़ाने की प्रथा ने भी इसी कारण अपना स्थान
बनाया होगा। एक बार सफाचट करा लो और योग करो,
तो
फौरन बढ़ जायेगे।
योग अब
धर्म का स्थान ग्रहण करता जा रहा है। पहले अतिक्रमण करने के लिए किनारे की
ओर धर्मस्थल बना लिया जाता था जिससे धार्मिक अनुयायी उस अतिक्रमित स्थल की
रक्षा करना अपना धर्म समझते
थे। अब लोग अतिक्रमण की जगह
योगाश्रम खोल लेते हैं और नगर निगम के अतिक्रमण हटाओं दस्ते के आने पर
भारतीय संस्कृति और योग विद्या पर
किया गया आक्रमण बताने लगते हैं। कुछ तो इसे कोका कोला आदि विदेशी
कम्पनियों के इशारे पर की गई कार्यवाही निरूपित करते हुये इतना कोलाहल करते
हैं कि अतिक्रमण की बात ही तूती की आवाज़ होकर रह जाती है। आप उद्योग खोलकर
कर्मचारियों का वेतन दबा सकते हैं या चाहे जब उन्हें नौकरी
से बाहर कर सकते हैं । यदि कोई यूनियन बनाये और अपनी मजदूरी माँगे
तो योगाश्रम का बोर्ड आपकी रक्षा करेगा। आप कह सकते हैं कि हमारे योग के
विरोध में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के ऐजेन्ट भारतीय संस्कृति के खिलाफ
षडयंत्र कर रहें है।
योगी होने
से आप विदेशी कम्पनियों के निशाने पर होने का ढोंग फैला जेड श्रेणी सुरक्षा
माँग सकते हैं और विदेश जाने के मौके पा सकते हैं। इमरजैसी में धीरेन्द्र
ब्रम्हचारी ने भी खूब योग सिखाया था पर बाद में देशी बन्दूकों
पर विदेशी मुहर लगाने वाला उनका कारखाना चर्चा
में आया था। चन्द्रास्वामी तो एक प्रधानमंत्री के धर्मगुरू थे व
धर्मज्ञान देने अनेक मुस्लिम देशों के प्रमुखों के मेहमान होते थे। मेरी
कामना है कि प्राचीनतम योग की ताज़ा हवा खूब देर तक चले और लोगों के कब्ज
ढीले करे। ऐलोपेथी दवाओं की
जगह आयुर्वेदिक दवाओं की दुकानें चलें तथा उन दवाओं को बनाने वाली
कंम्पनियों का मालिक कोई योग गुरू ही हो।
वैसे बाबा
के योग सिखाने वाले कार्यक्रम के दोनों सिरों और बीच में उन कंपनियों के
विज्ञापन दिखाये जा सकते हैं जिनमें बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के उत्पादनों
को बेचने के लिए सुन्दर ललनाएँ अपने रूप का छोंक लगा रही हों। आप मान सकते
हैं कि इन ललनाओं ने अपना रूप योग से ही सँवारा होगा। |
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