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| 03.22.2008 |
| असलियत कम गुमान ज्यादा दे वीरेन्द्र जैन |
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असलियत कम गुमान ज्यादा दे
बात कम कर बयान ज्यादा दे अब जमीनों के भाव ऊॅंचे हैं इसलिए आसमान ज्यादा दे राह जैसी है वैसी रहने दे रूह वाली उड़ान ज्यादा दे नौकरी छीन बन्द कर धंधे फैले हाथों को दान ज्यादा दे देह की देखभाल पूरी रख और भाषण में जान ज्यादा दे |
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