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| 10.24.2007 |
| यादें विपिन पंवार ’निशान’ |
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आ जाती हैं जब कभी यादें
खो जाते हैं हम गहरे खयालों में यादें, तड़पाती भी हैं यादें, रुलाती भी हैं यादें, हँसाती भी हैं। आ जाती हैं जब कभी यादें यादें, नींद को हमसे दूर ले जाती हैं यादें, दिल की गहराईयों को छू जाती हैं यादें, बीते लम्हे की याद दिलाती हैं आ जाती है जब कभी यादें। यादें, बीती जिन्दगी की तस्वीर बनाती हैं यादें, गुजरे कल पर विचार कराती हैं यादें, आँखों में अश्क भर लाती हैं यादें, लबों पर मुस्कुराहट लौटाती हैं आ जाती हैं जब कभी यादें। बचपन की यादें, जवानी की यादें दोस्तों की यादें, दुश्मनों की यादें देश की यादें, परदेश की यादें सुख की यादें, दुख की यादें बस यादें हमें इन तक पहुँचाती हैं आ जाती हैं जब कभी यादें। |
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