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10.24.2007
 
तुम न होती तो..... ?
विपिन पंवार ’निशान’

तुम न होती तो
यह दुनिया कैसे चलती
ज्ञान न होता दुनियादारी का
मालूम न पड़ता समुन्द्र की गहराई का
एहसास न होता आसमां की ऊँचाई का
न पहुँच पाता कोई चाँद पर

तुम न होती तो
यह दुनिया कैसे चलती
न ज्ञान होता पूर्व-पश्चिम का
न ज्ञान होता उत्तर-दक्षिण का
न पता होता शून्य से अनन्त का

तुम न होती तो
यह दुनिया कैसे चलती
न ज्ञान होता संगीत के सात सुरों का
न ज्ञान होता तबले की ताल का
न ज्ञान होत घुँघरुओं की झनकार का

तुम न होती तो
यह दुनिया कैसे चलती
न लिख पाता कोई रामायण
न लिख पाता कोई कुरान
न पढ़ पाता कोई बाइबल

तुम न होती तो
यह दुनिया कैसे चलती
न ज्ञान होता धन का
न ज्ञान होता ऋण का
मैं जानता हूँ मेरी ’विद्या’ कि

तुम न होती तो
’निशान’ आज यह भी न लिख पाता


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