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10.24.2007
 
मेरे प्रभु
विपिन पंवार ’निशान’

पल-पल समय गुजरता गया
दुनिया बदलती गयी
लेकिन मैं आज भी
टकटकी निगाह से
इक बच्चे की तरह
तुमको निहारता हूँ
कि तुम नहीं बदले
गरीब हो चाहे अमीर
सबके प्रति तुम्हारा
एक जैसा प्यार
झोपड़ी हो या महल
हर जगह तुम हो विराजमान
हर इक पर तुम हो मेहरबान
मेरे प्रभु.......


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