कितना सुन्दर, कितना प्यारा
कितना निश्चल, कितना निर्मल
होता है बचपन।
न कोई लालच, न कोई चिन्ता
उठकर गिरना, गिरकर उठना
उमंगों से भरा होता है बचपन।
कितना सुन्दर, कितना प्यारा
कितना निश्छल, कितना निर्मल
होता है बचपन।
दुनियादारी से दूर
नई-नई आशाओं से भरपूर
माँ के आँचल की छाँव में
रहता है बचपन।
कितना सुन्दर, कितना प्यारा
कितना निश्चल, कितना निर्मल
होता है बचपन।