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ISSN 2292-9754

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01.18.2017


वो उलझा हुआ सवाल थी

 उन पर शेर कहना किसकी मजाल थी,
वो हुस्न की ग़ज़ल थी, अम्साल थी।

बहरजा उन्हीं का बखान था,
मेरी औकात उनकी पाएमाल थी।

जो सुलझाने गए, उलझ गए,
वो उलझा हुआ सवाल थी।

बर्बाद हो गए और मजा आ गया,
वो उरुज थी या ज़वाल थी।

उसी के दर पर मेरा कत्ल हो गया,
नाहिद खंजर थी या ख़ुशज़माल थी।

ग़िज़ाब की तरह चुभता है ये हुस्न,
उनकी मुहब्बत गर्द-ए-मलाल थी।

अम्साल= मिसालें, दानिश=बुद्धि, पाएमाल=रौंदा हुआ,
उरुज=उन्नति, ज़वाल=पतन, नाहिद=युवती, ख़ुशजमाल=सुंदर,
ग़िज़ाब=आँख में पड़ा तिनका, गर्द-ए-मलाल=मन का मैल


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